अखबार और न्यूज़ चेनल

अखबार और न्यूज़ चेन्नल को पढने और देखने के पीछे हमारा उद्देश्य देश,विदेश,और समाज में घट रही घटनाओं को जानना होता है। पर बहुत हद तक न्यूज़ चैनल्स अपना मुख्य उदेश्य भूल ही गए है.इन्हे याद है तो बस अपने चैनल की टी.आर.पी और समाज को क्या दिखाना जरुरी इससे कोई मतलब नही है.हमें यह कहते बिल्कुल संकोच नही होगा के न्यूज़ चैनल टी.आर.पी की दोड़ में शामिल है.इन्हे इससे कोई लेना देना नही है की जो ख़बर ये दिखा रहे है उसका हमारे पर क्या असर पढ़ रहा है .आज न्यूज़ चैनल में जल रहे आदमी की कवरेज को बहुत नाटकीय ढंग से प्रस्तुते किया जाता है इस घटना को सनसनीखेज बना दिया जाता है.आज यदि कोई रिपोर्टर के सामने कोई व्यक्ति जल रहा होगा तो वो उसे शूट करना पसंद करेगा बजाये उसे बचाने के,उस रिपोर्टर के लिए उस आदमी कीजान की कोई कीमत नही होती.और हम लोग २६ नवम्बर २००९ के मुंबई में हुए आतंकी हमले की जो कवरेज न्यूज़ चेनल्स ने की थी उसे भी नही भुला सकते.पुरे विशव को इस घटना ने दिल देहला दिया था पैर हमारे न्यूज़ चेनल्स ने ऐसी कवरेज दिखाई के पुरे मीडिया जगत को शरमसार होना पड़ गया था इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की हमारे चेनल्स कितने लापरवाह हो गए है.नौबत यहाँ तक आ गई है कि न्यूज़ चेनल्स सवर्ग कि सीढी,नागिन,कॉमेडी शो.जेसी खबरे दिखने लगे है आज न्यूज़ के नाम पर राजू श्रीवास्तव का कॉमेडी प्रोग्राम दिखाते है.वही दूसरी ओर समाचार पत्रों की बात करे तो अब अखबारों में सुचनाए कम और विज्ञापन ज्यादा होते है.पता नही समाचार पत्रों और न्यूज़ चनेल्स का ये काम कब तक चलेगा कब ये अपने असली काम को जान कर फ़िर से खबरों को ज्यादा तवज्जो देंगे ..

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