आज मेने ब्लॉग लिखने की शुरुआत की ...मन में लिखने को तो बहुत कुछ है,बस जरुरत है शब्दों को एक धागे में पिरोने की...
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मेरे सपने.... वर्षों से रेगिस्तान के , इस तपती धूप में, एक बूंद पानी की आस मे, खड़ी हुँ, शायद कभी तो .... सहसा एक दिन, दुर आकाश मे, मुझे मेरे सपनो का, आशाओं का वो रंग दिखेगा , क्या जमीन की तरह, आसमान में भी, ये मरीचिका तो नही ? नही? वो तो मेरी तरफ ही आ रही थी। उसकी बढती नजदिकियां, कम कर रही थी, मेरे दर्द को, बढा रही थी, मेरे प्यास को, लेकिन, वक्त की आंधी, उड़ा ले गयी उसे, दुर, बहुत दुर, अब तो लगता है, वो एक मरीचिका सी...
सच का रास्ता ही दिल तक जाता है वक्त ने देखा है सबको उसे चलते भले देखता न हो कोई बड़े-बडे शिलालेखों पर नाम खुदवाकर कई राजाओं ने होने की कोशिश की उनके हटते ही उनका नाम लेवा भी रहा कोई कई अमीरों ने बनवाये अपने नाम से महलवक्त की मार से खँडहर में बदल गए अब देखता भी नहीं कोई आँखों से बसे कानों से सुने हाथों से स्पर्श किये गए जिंदा और मुर्दा बुत भुला दिए गए बसे दिल में लोगों के चलते हैं आज भी वक्त उनको नहीं मिटा पाता दौलत से न खरीदा जा सकता शोहरत से पसीजा नहीं करता शरीर को छू लेने से भी दिल किसी का अपना नहीं हुआ करता वह सच ही है जो दिल में बसा करता है दिमाग में कई ख्याल आते हैं दिल में तो बसता है एक कोई दौलत और शौहरत के ढेर पर बैठकर वक्त को जीत कादावा करने वालों तलवार के जोर परलोगों को डराने वालों अपनी सूरत पर इतराने वालों वक्त सबको मिटा देता है पर दिलों में बसे हुए नाम और तस्वीरों पर उसका रंग नहीं चढ़ता कोई सच ही वह रास्ता है जिस पर दिल के दरवाजे तक पहुंचता है कोई...
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